जबलपुर। जिस हाईकोर्ट से प्रदेश की न्याय व्यवस्था चलती है, उसी की नई वेबसाइट अगर सुनवाई के दौरान बफरिंग और हैंगिंग में उलझ जाए तो सवाल सिर्फ तकनीकी खराबी का नहीं, पूरे सिस्टम की कार्यक्षमता का है। आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान ऐसी ही स्थिति सामने आने पर जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की युगलपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई।
युगलपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की वेबसाइट ई-हियरिंग को सपोर्ट नहीं कर रही है और उसमें कई तकनीकी गड़बड़ियां हैं। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आईटी स्टाफ की नाकाबिलियत के कारण न्यायालय का कानूनी समय बर्बाद हुआ।
मामला तब और गंभीर हो गया जब रजिस्ट्रार आईटी के.एस. कुशवाहा को अदालत के समक्ष बुलाकर सिस्टम की स्थिति जांची गई। उनके सामने भी वेबसाइट पर लगातार बफरिंग और हैंगिंग की समस्या सामने आई। यानी जिस तकनीकी समस्या की शिकायत हो रही थी, वह अदालत के सामने ही दिखाई दे गई।
अब हाईकोर्ट ने गेंद सीधे IT व्यवस्था के पाले में डाल दी है। युगलपीठ ने रजिस्ट्रार आईटी से जवाब मांगा है कि हाईकोर्ट के कामकाज में ऐसी बाधा आखिर क्यों उत्पन्न हो रही है। साथ ही सात दिनों के भीतर विस्तृत जांच कर दोषी पाए जाने वाले IT कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मुख्य न्यायाधीश से संबंधित IT स्टाफ के विरुद्ध कार्रवाई का आग्रह किया है।
सवाल सीधा है—जब अदालत का समय ही तकनीकी खामियों में चला जाए तो डिजिटल न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता किसके भरोसे है? करोड़ों रुपये खर्च कर वेबसाइट तैयार करना पर्याप्त नहीं। उसे सुनवाई के दौरान भरोसेमंद तरीके से काम करना भी चाहिए।
न्याय में एक तारीख की देरी भी मायने रखती है। ऐसे में अदालत का समय बफरिंग और हैंगिंग में बर्बाद होना छोटी तकनीकी चूक नहीं मानी जा सकती।
अब सात दिन की जांच बताएगी कि गलती मशीन की थी, सिस्टम की थी या जिम्मेदारी निभाने वालों की।
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