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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में छात्रों के साथ अपने करियर का एक पुराना अनुभव साझा किया। उन्होंने करीब 50 साल पुराने उस घटनाक्रम का जिक्र किया, जब उनकी टीम को चीन में चीनी सेना ने पकड़ लिया था।
छात्रों को संबोधित करते हुए डोभाल ने बताया कि उस समय उन्हें लगा था कि उनका करियर शायद खत्म हो गया है। उन्होंने इस घटना को अपने शुरुआती पेशेवर जीवन के चुनौतीपूर्ण अनुभवों में से एक के तौर पर याद किया।
डोभाल ने छात्रों को बताया कि कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने और दबाव के बीच धैर्य बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण होता है। उनके मुताबिक, किसी भी चुनौती के दौरान परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, उनसे बाहर निकलने का रास्ता तलाशना जरूरी है।
दीक्षांत समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहने और देश व समाज के लिए अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करने की सीख भी दी। उन्होंने बदलती दुनिया में तकनीक, ज्ञान और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच बढ़ते संबंधों पर भी जोर दिया।
डोभाल का यह पुराना किस्सा समारोह में मौजूद छात्रों के बीच चर्चा का विषय बना। उन्होंने अपने अनुभव के जरिए यह संदेश दिया कि पेशेवर जीवन में अप्रत्याशित परिस्थितियां सामने आ सकती हैं, लेकिन उनसे मिले अनुभव आगे की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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