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फर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ED) नोटिस के जरिए कथित करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में युवराज मनचंदा की मौत ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर बना दिया है। आरोप है कि साइबर ठगों ने खुद को ED और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर मनचंदा को मनी लॉन्ड्रिंग के एक कथित मामले में फंसाने की धमकी दी और लगातार पैसे की मांग की।
ठगों ने डिजिटल अरेस्ट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए पीड़ित पर दबाव बनाया। रिपोर्ट के अनुसार, उसे धमकियां दी गईं और यहां तक कहा गया कि रकम नहीं देने पर उसकी पत्नी को बेचने जैसी भयावह धमकी दी गई। लगातार मानसिक दबाव और कथित आर्थिक शोषण के बीच मनचंदा की मौत हो गई।
जांच में गुरुग्राम के एक दंपती की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। आरोप है कि दंपती कथित साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा था और फर्जी सरकारी दस्तावेजों व नोटिस के जरिए लोगों को डराकर रकम वसूलने के खेल में शामिल था।
यह मामला एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट और फर्जी जांच एजेंसी बनकर की जा रही ठगी के खतरे को सामने लाता है। ED, CBI या पुलिस फोन अथवा वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल रूप से गिरफ्तार कर पैसे ट्रांसफर करने का आदेश नहीं देतीं।
मामले में पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों की भूमिका, कथित रकम तथा पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

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