नई दिल्ली। कभी दिल्ली की पहचान और शहरी ठाठ का प्रतीक रहा कनॉट प्लेस एक बार फिर अपने पुराने रंग में नजर आने लगा है। BRICS सम्मेलन की तैयारियों के बीच बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई तो बाजार की तस्वीर ही बदल गई। सड़कों और फुटपाथों पर पसरा कब्जा हटते ही वह खुलापन दिखाई देने लगा, जिसकी वजह से कनॉट प्लेस को कभी राजधानी का सबसे खास कारोबारी और पर्यटन केंद्र माना जाता था।
अतिक्रमण हटने के बाद गोलाकार बाजार की सफेद कॉलोनियल इमारतें, चौड़े रास्ते और व्यवस्थित पैदल क्षेत्र ज्यादा साफ नजर आ रहे हैं। स्थानीय कारोबारियों और पुराने दिल्लीवासियों के बीच इसकी तुलना 1980 के दशक के कनॉट प्लेस से की जा रही है, जब यहां पैदल चलना अपेक्षाकृत आसान था और बाजार की पहचान अव्यवस्था से नहीं, उसकी भव्यता से होती थी।
हालांकि इस बदलाव ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की वजह से कुछ दिनों में कनॉट प्लेस का कायाकल्प संभव है, तो सामान्य दिनों में यही व्यवस्था क्यों नहीं रह सकती? अतिक्रमण हटाना केवल किसी बड़े आयोजन की मजबूरी नहीं, बल्कि राजधानी के स्थायी शहरी प्रबंधन का हिस्सा होना चाहिए।
BRICS सम्मेलन खत्म होने के बाद असली परीक्षा प्रशासन की होगी। निगरानी ढीली पड़ी और कब्जे दोबारा लौटे तो 80 के दशक की यह झलक फिर सिर्फ तस्वीरों में रह जाएगी।

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