लंबे समय तक धूम्रपान करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। लगातार सिगरेट का धुआं फेफड़ों की वायु नलियों में सूजन बढ़ा सकता है और सांस लेने की क्षमता को धीरे-धीरे कम कर सकता है। प्रदूषण के लंबे संपर्क से यह नुकसान और बढ़ सकता है। हालांकि, स्मोकिंग छोड़ने के बाद शरीर में रिकवरी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
डॉक्टरों के अनुसार सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम पूरी तरह धूम्रपान बंद करना है। केवल सिगरेट कम करने से जोखिम खत्म नहीं होता। धूम्रपान छोड़ने के बाद समय के साथ खांसी और सांस से जुड़ी कुछ समस्याओं में सुधार हो सकता है, जबकि फेफड़ों को आगे होने वाले नुकसान से बचाने में भी मदद मिलती है।
रिकवरी के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि और सांस से जुड़े व्यायाम उपयोगी हो सकते हैं। डॉक्टर की सलाह से वॉकिंग, साइकिलिंग या अन्य एरोबिक एक्सरसाइज धीरे-धीरे शुरू की जा सकती हैं। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी भी सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करते हैं।
प्रदूषण और धूल-धुएं से बचाव भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता का मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर लंबे समय से खांसी, सीने में दर्द, घरघराहट या सांस फूलने की समस्या है तो पल्मोनोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।
ध्यान रखें, फेफड़ों का कितना नुकसान हुआ है और कितना सुधार संभव है, यह व्यक्ति की उम्र, धूम्रपान की अवधि और बीमारी पर निर्भर करता है।

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