अश्वगंधा को लेकर लिवर और किडनी की सुरक्षा से जुड़ी चिंता के बीच 2026 की एक नई क्लिनिकल स्टडी में राहत देने वाले नतीजे सामने आए हैं। 24 सप्ताह तक किए गए मल्टीसेंटर, रैंडमाइज्ड और प्लेसीबो-कंट्रोल्ड ट्रायल में 1,200 वयस्कों को स्टैंडर्डाइज्ड अश्वगंधा रूट एक्सट्रैक्ट दिया गया। अध्ययन में लिवर एंजाइम, बिलीरुबिन, क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया जैसे मानकों की निगरानी की गई और उपचार से जुड़ी लिवर या किडनी इंजरी का कोई प्रमाण नहीं मिला।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अश्वगंधा हर व्यक्ति के लिए पूरी तरह जोखिम-मुक्त है। इससे पहले प्रकाशित मेडिकल रिपोर्टों में अश्वगंधा लेने के बाद दुर्लभ मामलों में लिवर इंजरी दर्ज की गई है। कुछ मामलों में पीलिया, खुजली और लिवर फंक्शन टेस्ट में गड़बड़ी सामने आई। खासकर पहले से लिवर की बीमारी या सिरोसिस वाले लोगों में सावधानी जरूरी है।
विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अलग-अलग कंपनियों के अश्वगंधा उत्पादों में सामग्री, मात्रा और गुणवत्ता अलग हो सकती है। इसलिए बिना जांच या लंबे समय तक खुद से सेवन करना उचित नहीं माना जाता।
यदि अश्वगंधा लेने के बाद आंखों या त्वचा में पीलापन, गहरे रंग का पेशाब, लगातार खुजली, पेट दर्द या असामान्य कमजोरी महसूस हो तो सेवन रोककर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गर्भावस्था, स्तनपान, थायरॉयड या ऑटोइम्यून बीमारी तथा कुछ दवाओं के सेवन की स्थिति में भी चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

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