बिप्लब देव की एंट्री से एमपी भाजपा में पुराने रिश्ते की चर्चा, संगठन से लेकर वन विभाग तक कई सवाल



भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल के साथ राजनीतिक गलियारों में पुराने राजनीतिक-संगठनात्मक रिश्तों की चर्चा भी तेज हो गई है। भाजपा ने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव बिप्लब कुमार देव को मध्यप्रदेश भाजपा का नया प्रभारी बनाया है। देव के शुरुआती राजनीतिक दौर में सतना सांसद गणेश सिंह के साथ निज सहायक के रूप में काम करने का उल्लेख मिलता है। नई जिम्मेदारी के बाद दोनों के पुराने परिचय को लेकर प्रदेश भाजपा के भीतर चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। हालांकि, इस पुराने संबंध का प्रदेश संगठन की आगामी राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह भविष्य के घटनाक्रम से ही स्पष्ट होगा।


इधर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नगर निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर जल्द ही जिलावार भाजपा संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक करने वाले हैं। मुख्यमंत्री निवास पर प्रस्तावित बैठकों में प्रभारी मंत्री, सांसद और विधायक भी शामिल होंगे। प्रत्येक जिले के लिए एजेंडा तैयार किया जा रहा है।


दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में भी मध्यप्रदेश से जुड़े नेताओं की मौजूदगी बढ़ी है। आशीष अग्रवाल को राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिली है। राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ राष्ट्रीय प्रभारी हैं। खरगोन सांसद गजेंद्र पटेल को झारखंड और पूर्व मंत्री डॉ. अरविंद भदौरिया को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्य को पश्चिम बंगाल तथा राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार को राजस्थान का सह-प्रभारी बनाया गया है। इंदौर के प्रदीप भंडारी भी केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय सह-मीडिया प्रभारी की भूमिका में हैं।


प्रशासनिक मोर्चे पर मुख्यमंत्री की विभागीय समीक्षाएं भी चर्चा में हैं। हाल की समीक्षा में कुछ अधिकारियों के काम की गति पर नाराजगी जताए जाने के बाद आगामी प्रशासनिक फेरबदल को लेकर अटकलें हैं। हालांकि, किसी अधिकारी पर कार्रवाई होगी या नहीं, इसका अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर ही स्पष्ट होगा।


सबसे ज्यादा सवाल वन विभाग में लंबे समय से चल रहे अतिरिक्त प्रभार को लेकर उठ रहे हैं। सिवनी, पन्ना टाइगर रिजर्व, संजय टाइगर रिजर्व तथा रीवा, भोपाल, ग्वालियर और शहडोल सर्किल में लंबे समय से पद अतिरिक्त प्रभार में चलने की बात सामने आ रही है। सिवनी में डीएफओ स्तर के अधिकारी को सीसीएफ स्तर के पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने को लेकर वरिष्ठता और प्रशासनिक मानदंडों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन अतिरिक्त प्रभारों की व्यवस्था की समीक्षा करती है या नहीं।


प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव, जिलों की चुनावी तैयारियां और प्रशासनिक फेरबदल—तीनों मोर्चों पर आने वाले सप्ताह मध्यप्रदेश की राजनीति और शासन-व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

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