घर में पड़ी एक्सपायर या बची हुई दवाओं को अक्सर लोग सामान्य कचरे के साथ फेंक देते हैं। लेकिन गलत तरीके से दवाओं का निपटान बच्चों और जानवरों के लिए खतरा पैदा करने के साथ मिट्टी और पानी को भी प्रदूषित कर सकता है। भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने भी एक्सपायर और इस्तेमाल न होने वाली दवाओं के सुरक्षित निपटान के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
तो क्या करें?
सबसे सुरक्षित विकल्प है कि घर में जमा अनावश्यक या एक्सपायर दवाओं के लिए उपलब्ध दवा-वापसी या संग्रह केंद्र की जानकारी लें और वहां जमा करें। यदि आपके इलाके में ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो स्थानीय फार्मेसी या स्वास्थ्य केंद्र से पूछें कि वे ऐसी दवाएं स्वीकार करते हैं या नहीं। दवाओं को किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना भी उचित नहीं है।
दवाओं को शौचालय या नाली में बहाना भी सामान्य तरीका नहीं होना चाहिए, क्योंकि दवाओं के अवशेष जल स्रोतों तक पहुंच सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गलत तरीके से फार्मास्यूटिकल कचरे का निपटान पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
दवाओं को बच्चों की पहुंच से दूर, अलग और सुरक्षित जगह पर तब तक रखें जब तक उनके निपटान की उचित व्यवस्था न हो। खासकर इंजेक्शन, सुई, कैंसर की दवाएं और अन्य खतरनाक दवाओं को सामान्य कचरे में न डालें।
एक अध्ययन में भारत में लोगों के बीच एक्सपायर दवाओं को घरेलू कचरे में फेंकने की प्रवृत्ति भी सामने आई है। इसलिए जरूरत है कि दवा खत्म होने के बाद बची गोलियों को घर में जमा करने के बजाय उनके सुरक्षित निपटान की व्यवस्था अपनाई जाए।

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