देहरादून। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में दर्ज एफआईआर ने राजनीतिक टकराव को तेज कर दिया है। एफआईआर के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देहरादून में पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ को ज्ञापन सौंपकर मुकदमा तत्काल वापस लेने की मांग की। कांग्रेस ने मांग पूरी नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
विवाद की शुरुआत हल्द्वानी के रामलीला मैदान से हुई। 8 अगस्त को यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित तौर पर मैदान में ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम किया गया था। राहुल गांधी ने इस घटना पर सवाल उठाते हुए इसे जातिगत भेदभाव और छुआछूत से जोड़कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद उत्तराखंड पुलिस ने शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया।
कांग्रेस अब इस मामले को केवल राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी ने शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग करते हुए अलग-अलग थानों में शिकायतें दी हैं। देहरादून में सचिवालय तक मार्च और आगे प्रदेशभर में प्रदर्शन की रणनीति भी घोषित की गई है।
उधर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी पर राजनीतिक मुद्दे को जाति और भेदभाव से जोड़ने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी राहुल पर निशाना साधा है।
यानी एक एफआईआर ने अब कानूनी विवाद को सीधे राजनीतिक शक्ति-परीक्षण में बदल दिया है। उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच यह मुद्दा कांग्रेस और भाजपा के बीच नई सियासी जंग का बड़ा केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।

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