अस्पताल चुनने के मामले में मरीजों को अब केवल डॉक्टर, सुविधा या अस्पताल के नाम पर निर्भर नहीं रहना पड़ सकता। केंद्र सरकार स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के आधार पर ग्रेडिंग/रेटिंग व्यवस्था को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य मरीजों को अस्पताल की सेवाओं की गुणवत्ता के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है।
दरअसल, स्वास्थ्य मंत्रालय पहले से ही National Quality Assurance Standards (NQAS) के जरिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता का आकलन कर रहा है। 28 फरवरी 2025 तक देशभर में 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 24,364 स्वास्थ्य सुविधाएं NQAS प्रमाणित हो चुकी थीं।
राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा ढांचे में भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए patient-safety indicators पर आधारित ranking/grading system का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें आग से सुरक्षा, मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और मरीजों की पहचान जैसी व्यवस्थाओं को गुणवत्ता के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा गया है।
नई व्यवस्था लागू होने पर सरकारी के साथ निजी अस्पतालों की गुणवत्ता को भी अधिक पारदर्शी तरीके से समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, 2027 से देशभर में अनिवार्य अस्पताल रेटिंग शुरू होने की अंतिम तारीख और विस्तृत ग्रेडिंग मानदंड की आधिकारिक अधिसूचना अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में 28 फरवरी 2026 तक आयुष्मान भारत योजना के तहत 36,229 अस्पताल सूचीबद्ध थे, जिनमें 19,483 सरकारी और 16,746 निजी अस्पताल शामिल थे।
अब सवाल यह है कि नई ग्रेडिंग केवल कागजी प्रमाणपत्र बनेगी या मरीजों को वास्तव में यह बताने में सक्षम होगी कि कहां इलाज की गुणवत्ता, सुरक्षा और सुविधा का स्तर कितना है।

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