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अपने ही गढ़ में सिंधिया के खिलाफ उठे विरोध के सुर, गुना से ग्वालियर तक अपनों की नाराजगी!

गुना में किसान बोले खाद नहीं मिली, युवाओं ने सड़क पर घेरा काफिला; ग्वालियर में काले झंडे, भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प—पन्नालाल शाक्य की नाराजगी भी पहले सामने आ चुकी


विशेष रिपोर्ट | प्रणव बजाज



ग्वालियर/गुना। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक प्रभाव वाले ग्वालियर-चंबल अंचल में सितंबर 2026 के दौरान लगातार ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर नाराजगी और संगठनात्मक खींचतान की चर्चा तेज हुई है। इसे सीधे तौर पर सिंधिया के खिलाफ व्यापक बगावत कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन एक के बाद एक सामने आई घटनाएं जरूर सवाल खड़े करती हैं।


17 सितंबर को गुना में किसानों ने सिंधिया के सामने खाद की समस्या रखी। एक किसान ने खाद नहीं मिलने की शिकायत करते हुए नाराजगी जताई। सिंधिया ने तत्काल कलेक्टर को किसानों के नाम दर्ज कर समस्या के समाधान के निर्देश दिए। किसानों ने ऑनलाइन टोकन व्यवस्था और कथित कालाबाजारी की शिकायतें भी उठाईं।


18 सितंबर के आसपास गुना में सड़क की खराब हालत को लेकर युवाओं ने सिंधिया का काफिला रोककर नाराजगी जताई। युवाओं ने सड़क नहीं बनने पर वोट नहीं देने की बात कही। इसके बाद सिंधिया ने सड़क निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपये की स्वीकृति और प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।


लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा 21 सितंबर को ग्वालियर में हुई। कुशवाहा छात्रावास के भूमिपूजन कार्यक्रम में सिंधिया के संबोधन के दौरान कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाए। इसके बाद कार्यक्रम स्थल पर दो पक्षों में विवाद और हाथापाई हुई। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और कुछ लोगों को थाने ले जाया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद की बात सामने आई है, हालांकि पूरे विवाद के कारणों को लेकर आधिकारिक तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।


इससे पहले जून 2026 में गुना विधायक पन्नालाल शाक्य की सिंधिया के कार्यक्रमों और एक महत्वपूर्ण बैठक से गैरमौजूदगी तथा उनके सार्वजनिक बयानों ने भी स्थानीय भाजपा में खींचतान की चर्चा को हवा दी थी।


यानी तस्वीर यह है कि गुना में किसान और युवा स्थानीय मुद्दों पर सीधे सवाल उठा रहे हैं, जबकि ग्वालियर में पार्टी-संगठन और समर्थक समूहों के बीच टकराव सार्वजनिक कार्यक्रम तक पहुंच गया। सवाल अब यह है कि ये घटनाएं अलग-अलग स्थानीय असंतोष हैं या सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्र में बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत? इसका जवाब आने वाले दिनों में भाजपा के स्थानीय संगठन और नेताओं के रुख से अधिक स्पष्ट होगा।

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