नई दिल्ली । बौद्धिक प्रतिकार
पंचांग के अनुसार 22 सितंबर 2026 को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी का धार्मिक महत्व केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है। हिंदू धार्मिक परंपरा में इससे जुड़ी कथाएं सृष्टि की उत्पत्ति के रहस्य से भी जोड़ी जाती हैं
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पुराणों में वर्णित मान्यता के अनुसार, जब भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में विराजमान थे, तब उनकी नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट हुआ। इसी कमल पर ब्रह्माजी का प्राकट्य हुआ। ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना का कार्य संभाला, जबकि भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में माना गया।
कथा के अनुसार, कमल पर प्रकट होने के बाद ब्रह्माजी ने अपने उद्गम का रहस्य जानने का प्रयास किया। उन्होंने कमल की नाल के माध्यम से उसके स्रोत तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने तप किया। धार्मिक मान्यता में इसी तप के बाद उन्हें सृष्टि-रचना का ज्ञान प्राप्त हुआ।
इस कथा में कमल को सृष्टि, पवित्रता और दिव्य उत्पत्ति का प्रतीक माना जाता है। भगवान विष्णु की नाभि से कमल का प्रकट होना और उस पर ब्रह्मा का विराजमान होना वैष्णव परंपरा की प्रमुख सृष्टि-कथाओं में शामिल है।
परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ इस कथा का स्मरण भक्तों के लिए आध्यात्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान विष्णु की आराधना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

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