चंद्रपुर। महाराष्ट्र के चंद्रपुर में लालपेठ स्थित ऐतिहासिक विशाल शिवलिंग के जीर्णोद्धार समारोह से ठीक पहले विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस की मौजूदगी में मंगलवार को प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने मंदिर समिति को कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर नोटिस जारी कर दिया।
मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि लालपेठ का यह विशाल शिवलिंग राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है। एएसआई के अनुसार संरक्षित स्मारक के आसपास 100 मीटर का क्षेत्र प्रतिबंधित होता है, जहां नए निर्माण की अनुमति नहीं होती। निरीक्षण के दौरान शिवलिंग परिसर में ग्रेनाइट लगाने, सीमेंट की ईंटों से दीवार बनाने और पक्का शेड तैयार किए जाने पर आपत्ति दर्ज की गई।
एएसआई ने मंदिर समिति को निर्माण कार्य तत्काल रोकने, कथित निर्माण हटाने और परिसर को पूर्व स्थिति में लाने के निर्देश दिए हैं। नियमों के उल्लंघन पर दो वर्ष तक की सजा, एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है। पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर समिति के जिम्मेदार पदाधिकारी के खिलाफ पुलिस शिकायत की संभावना भी जताई गई है।
बताया जा रहा है कि स्थानीय भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार की पहल और निधि से परिसर में काम कराया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि संरक्षित स्मारक के प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं?
धार्मिक आयोजन अपनी जगह है, लेकिन संरक्षित विरासत पर कानून का सवाल उससे बड़ा है। क्या जीर्णोद्धार के नाम पर नियमों की अनदेखी हुई, या संबंधित पक्ष के पास वैध अनुमति मौजूद है? इसका जवाब अब एएसआई की आगे की कार्रवाई और मंदिर समिति के स्पष्टीकरण से सामने आएगा।

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