चेन्नई। तमिलनाडु के पूर्व नगर प्रशासन मंत्री और द्रमुक नेता के.एन. नेहरू को कथित ₹1,020 करोड़ के टेंडर घोटाले में मुख्य आरोपी बनाया गया है। राज्य की सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने नेहरू समेत कुल 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप सरकारी ठेकों में कथित हेरफेर और ठेकेदारों से ‘पार्टी फंड’ के नाम पर अवैध रकम वसूलने से जुड़ा है।
मामला वर्ष 2021 से 2025 के बीच नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग के अंतर्गत दिए गए ठेकों से संबंधित बताया गया है। डीवीएसी की प्राथमिकी के अनुसार पसंदीदा ठेकेदारों को निविदा खुलने से पहले ही चिन्हित किया जाता था और कथित तौर पर ठेके की राशि का 7.5 से 10 प्रतिशत तक ‘पार्टी फंड’ के नाम पर लिया जाता था।
जांच का आधार प्रवर्तन निदेशालय की 258 पन्नों की रिपोर्ट है, जो दिसंबर 2025 में डीवीएसी को भेजी गई थी। रिपोर्ट में सरकारी ठेकों की प्रक्रिया में कथित हेरफेर से लगभग ₹1,020 करोड़ के अनुचित लाभ का आरोप लगाया गया था।
एफआईआर में कौन-कौन?
डीवीएसी ने के.एन. नेहरू के अलावा उनके भाइयों के.एन. मणिवन्नन और एन. रविचंद्रन, करीबी सहयोगी कवि प्रसाद, टीवीएच समूह से जुड़े डी. रमेश और डी. प्रभु, पूर्व नगर नियोजन अधिकारी आर. शशिप्रिया, पूर्व क्षेत्रीय अभियंता जी. बालचंद्रन और जी. मुरुगेसन, पूर्व विधायक एस. सुदर्शनम और जे.जे. एबेनेजर, तथा सी एंड टी कंस्ट्रक्शंस से जुड़े पदाधिकारियों और ठेकेदार के. सतीश कुमार को आरोपी बनाया है।
जांच में कथित व्हाट्सऐप बातचीत, तस्वीरें और हिसाब-किताब से जुड़े दस्तावेज भी सामने आने की बात कही गई है। एक मामले में ₹525.31 लाख के तीन वर्षाजल निकासी ठेकों के सामने ₹55.15 लाख की कथित ‘पार्टी फंड’ राशि दर्ज होने का उल्लेख है।
ध्यान रहे: ₹1,020 करोड़ को प्राथमिकी में आरोपित कथित अनुचित लाभ/भ्रष्टाचार नेटवर्क से जोड़ा गया है; इसे सीधे “₹1,020 करोड़ की सरकारी राशि चोरी” कहना सही नहीं होगा। मामला अभी जांच के चरण में है और आरोप अदालत में सिद्ध होना बाकी हैं।

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