नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ‘संविधान और शरीयत संरक्षण आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। बोर्ड ने अपने प्रस्तावित अभियान का एजेंडा सामने रखते हुए इसे संविधान में मिले अधिकारों और मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े मुद्दों की रक्षा से जोड़ा है।
बोर्ड ने कहा है कि वह इस अभियान के जरिए संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानून से जुड़े विषयों पर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाएगा। संगठन ने नागरिकों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज से आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की है।
AIMPLB लंबे समय से मुस्लिम व्यक्तिगत कानून और धार्मिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर अपनी राय रखता रहा है। समान नागरिक संहिता, विवाह-विरासत से जुड़े कानून और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे विषयों पर बोर्ड समय-समय पर सरकार और राजनीतिक दलों के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराता रहा है।
बोर्ड का कहना है कि संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धार्मिक मामलों का पालन करने का अधिकार देता है। इसी आधार पर वह मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा को महत्वपूर्ण मुद्दा मानता है।
हालांकि इस तरह के अभियान का राजनीतिक और सामाजिक असर भी देखने को मिल सकता है। संविधान, व्यक्तिगत कानून और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे पहले से ही देश में व्यापक बहस का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में बोर्ड का नया आंदोलन आने वाले दिनों में इन विषयों पर बहस को और तेज कर सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि ‘संविधान और शरीयत संरक्षण आंदोलन’ का स्वरूप क्या होगा, किन राज्यों में इसकी गतिविधियां होंगी और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों की इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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