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राष्ट्रीय हित सर्वोपरि, कर नीति पर परिपक्व बहस जरूरी: निर्मला सीतारमण

 

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर नीति को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कर व्यवस्था पर बहस केवल तत्काल राजनीतिक लाभ या आलोचना तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश की आर्थिक जरूरतों, राजस्व व्यवस्था और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखकर परिपक्व तरीके से होनी चाहिए।



वित्त मंत्री के मुताबिक कर नीति का उद्देश्य केवल सरकार के लिए राजस्व जुटाना नहीं है। इसका व्यापक असर निवेश, कारोबार, रोजगार, उपभोग और अर्थव्यवस्था की गति पर पड़ता है। ऐसे में करों में बदलाव या किसी नई व्यवस्था पर चर्चा करते समय उसके दीर्घकालिक प्रभावों को समझना जरूरी है।


सीतारमण ने कर सुधारों को लेकर तथ्य आधारित संवाद की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन चर्चा आंकड़ों और वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर होनी चाहिए।


उन्होंने संकेत दिया कि बदलती अर्थव्यवस्था और वैश्विक परिस्थितियों के बीच कर व्यवस्था को लगातार अधिक सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने की जरूरत है। उनका जोर इस बात पर रहा कि कर नीति पर होने वाली बहस में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय आर्थिक हित को केंद्र में रखा जाए।

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