फाइबर शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में शामिल है। यह पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है और मल त्याग को नियमित रखने में भूमिका निभाता है। डाइट में लंबे समय तक फाइबर की मात्रा कम रहने पर सबसे आम समस्या कब्ज के रूप में सामने आ सकती है। मल सख्त होना, शौच में जोर लगाना या कई दिनों तक पेट साफ न होना भी इसका संकेत हो सकता है।
फाइबर की कमी के साथ कुछ लोगों को पेट फूलना, पाचन संबंधी परेशानी और आंतों की गतिविधि में बदलाव महसूस हो सकता है। हालांकि, ऐसे लक्षण केवल फाइबर की कमी के कारण ही हों, यह जरूरी नहीं है। लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
फाइबर की जरूरत पूरी करने के लिए भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, चने, राजमा और अन्य फलियां, मेवे और बीज शामिल किए जा सकते हैं। फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाना बेहतर होता है, क्योंकि अचानक अधिक फाइबर लेने से गैस और पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है।
फाइबर बढ़ाते समय पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। केवल फाइबर बढ़ाने और पानी कम पीने से कब्ज की समस्या कुछ लोगों में और बढ़ सकती है। रोजाना भोजन में अलग-अलग स्रोतों से फाइबर शामिल करना लंबे समय के लिए ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।
अगर कब्ज लगातार बनी रहती है, मल में खून आता है, अचानक वजन कम हो रहा है या पेट दर्द जैसी समस्या है, तो इसे केवल फाइबर की कमी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

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