नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के मंच से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल को लेकर कड़ा रुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि ईरान किसी धमकी या दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है और अपनी संप्रभुता तथा राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।
पेजेश्कियान ने अपने संबोधन में अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संघर्ष के दौरान आम लोगों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। ईरानी राष्ट्रपति का कहना था कि सैन्य दबाव के जरिए ईरान को अपनी नीतियां बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
ब्रिक्स के मंच से क्यों अहम है संदेश?
ईरान के लिए ब्रिक्स केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि पश्चिमी दबाव के बीच वैकल्पिक कूटनीतिक साझेदारी मजबूत करने का माध्यम भी बन रहा है। भारत में आयोजित सम्मेलन के दौरान पेजेश्कियान का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान को लेकर अंतरराष्ट्रीय मतभेद लगातार बने हुए हैं।
ईरान की रणनीति में रूस और चीन जैसे देशों के साथ संबंध महत्वपूर्ण हैं, जबकि भारत भी पश्चिम एशिया में अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को संतुलित करता रहा है।
आगे क्या होगा?
पेजेश्कियान के बयान का असर केवल ईरान-अमेरिका संबंधों तक सीमित नहीं है। यदि तनाव बढ़ता है तो ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों, क्षेत्रीय व्यापार और वैश्विक कूटनीति पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि ईरानी राष्ट्रपति के आरोपों और दावों को उनके पक्ष के बयान के रूप में देखना जरूरी है। वास्तविक स्थिति का आकलन स्वतंत्र और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से पुष्टि के बाद ही किया जा सकता है। ब्रिक्स मंच से आया संदेश फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तेहरान दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता पर जोर दे रहा है।

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