बौद्धिक प्रतिकार | स्वास्थ्य
विटामिन और मिनरल शरीर के लिए जरूरी हैं, लेकिन इनका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को हर सप्लीमेंट रोज लेना चाहिए। जरूरत से ज्यादा मात्रा या गलत तरीके से सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है। खासकर कैल्शियम, विटामिन D3, जिंक और फोलेट जैसे सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार लेना बेहतर है।
विटामिन B12: इसे सुबह नाश्ते के साथ या खाली पेट लिया जा सकता है। यदि डॉक्टर ने कमी के कारण इसकी खुराक तय की है तो उसी मात्रा और अवधि का पालन करें। शाकाहारी लोगों में B12 की कमी अपेक्षाकृत अधिक देखी जा सकती है।
मैग्नीशियम: इसे अक्सर शाम या रात में भोजन के बाद लेना सुविधाजनक रहता है। इससे कुछ लोगों को आराम और नींद में मदद महसूस हो सकती है। किडनी की बीमारी में डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
विटामिन D3: यह वसा में घुलने वाला विटामिन है, इसलिए इसे ऐसे भोजन के साथ लेना बेहतर रहता है जिसमें थोड़ी वसा हो। इसकी जरूरत और डोज रक्त जांच के आधार पर तय की जानी चाहिए।
विटामिन C: इसे भोजन के साथ या बाद में लिया जा सकता है। पेट में जलन या एसिडिटी होने पर खाली पेट लेने से बचें।
जिंक: भोजन के बाद लेना पेट के लिए अधिक आरामदायक हो सकता है। लंबे समय तक अधिक मात्रा में जिंक लेने से कॉपर की कमी हो सकती है।
कैल्शियम: इसकी खुराक और प्रकार महत्वपूर्ण हैं। कैल्शियम को आयरन या कुछ दवाओं के साथ एक ही समय पर लेने से उनका अवशोषण प्रभावित हो सकता है, इसलिए दवाओं के बीच अंतर रखना जरूरी हो सकता है।
फोलेट/फोलिक एसिड: इसे भोजन के साथ या बिना लिया जा सकता है। लेकिन बिना जांच या चिकित्सकीय सलाह लंबे समय तक उच्च मात्रा में लेने से B12 की कमी छिप सकती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि सप्लीमेंट की जरूरत, मात्रा और अवधि व्यक्ति की उम्र, खान-पान, बीमारी, रक्त जांच और चल रही दवाओं पर निर्भर करती है। इसलिए केवल सोशल मीडिया या किसी लेख के आधार पर सभी सात सप्लीमेंट शुरू करना सही तरीका नहीं है।

Post a Comment