नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम यानी ONGC ने अपनी कारोबारी मजबूती को लेकर भरोसा जताया है। कंपनी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत 60 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहती है, तब भी कंपनी के कारोबार पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने इसके पीछे ONGC के विविध कारोबारी ढांचे को बड़ी वजह बताया। कंपनी केवल तेल और गैस के उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पास अपस्ट्रीम के साथ डाउनस्ट्रीम कारोबार का भी मजबूत आधार है। यही संतुलित ढांचा तेल की कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव के दौरान कंपनी के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
आमतौर पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने या घटने का असर तेल कंपनियों की आय और मुनाफे पर पड़ता है। लेकिन ONGC का अलग-अलग क्षेत्रों में फैला कारोबार जोखिम को संतुलित करने में मदद करता है। अपस्ट्रीम कारोबार में तेल और गैस की खोज तथा उत्पादन शामिल है, जबकि डाउनस्ट्रीम गतिविधियां तेल के प्रसंस्करण और उससे जुड़े उत्पादों के कारोबार से संबंधित होती हैं।
अरुण कुमार सिंह का कहना है कि कंपनी ने अपने कारोबार को इस तरह तैयार किया है कि बाजार की अस्थिरता के बावजूद उसका वित्तीय ढांचा मजबूत बना रहे। कच्चे तेल की कीमतों पर वैश्विक तनाव, मांग और आपूर्ति का सीधा असर पड़ता है, इसलिए आने वाले समय में बाजार की चाल पर निवेशकों और ऊर्जा क्षेत्र की नजर बनी रहेगी।
ONGC का मानना है कि उसका विविध कारोबार मॉडल ही बदलते वैश्विक तेल बाजार में उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

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