भोपाल। मध्यप्रदेश में हजारों करोड़ रुपये की लागत वाली शहरी विकास परियोजनाएं मंजूरियों और जमीन से जुड़े मामलों के बीच अटकी हुई हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रदेश में ₹6,637 करोड़ से अधिक की 23 शहरी परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई है। रेलवे, NHAI, वन एवं पर्यावरण मंजूरी तथा भूमि संबंधी अड़चनों के कारण कई योजनाएं निर्धारित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों में परिवहन, सड़क, बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं से जुड़े विकास को गति देना है। लेकिन अलग-अलग विभागों से अनुमति लेने की प्रक्रिया लंबी होने के कारण परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित हो रही है।
सबसे बड़ी चुनौती उन योजनाओं में सामने आ रही है, जिनमें रेलवे की जमीन अथवा क्रॉसिंग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से संबंधित अनुमति, वन भूमि या पर्यावरणीय स्वीकृति की जरूरत है। कई मामलों में जमीन उपलब्ध होने के बावजूद आवश्यक मंजूरियां नहीं मिल पाने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
₹6,637 करोड़ की परियोजनाओं का इस तरह अटकना केवल निर्माण में देरी का मामला नहीं है। समय बढ़ने के साथ निर्माण लागत बढ़ने और नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं में देरी की आशंका भी रहती है। ऐसे में सवाल यह है कि जिन परियोजनाओं को मंजूरी देकर बजट और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, उनके लिए अंतर-विभागीय मंजूरियों का रास्ता पहले से क्यों साफ नहीं किया गया?
अब निगाह सरकार पर है कि इन 23 परियोजनाओं की अड़चनें कब दूर होती हैं और करोड़ों रुपये की योजनाएं जमीन पर कब रफ्तार पकड़ती हैं।

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