सागर। जहरीली शराब कांड के बाद मध्यप्रदेश की सियासत और पुलिस व्यवस्था पर सवाल और तीखे हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया पर हर महीने 50 लाख रुपये की कथित वसूली का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW से कराने की मांग की है।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि अवैध शराब के कारोबार को संरक्षण देने वाली व्यवस्था की जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके आरोप गलत साबित होते हैं तो एसपी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं और वे अपने आरोपों को अदालत में साबित करने के लिए तैयार हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि सागर शराब कांड के बाद सरकार पहले ही न्यायिक जांच के आदेश दे चुकी है। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव हुए हैं। इसके बावजूद सवाल बना हुआ है कि कार्रवाई केवल छोटे स्तर के आरोपियों और अधिकारियों तक सीमित रहेगी या कथित अवैध शराब नेटवर्क की आर्थिक कड़ियां भी खंगाली जाएंगी।
जांच के दौरान पुलिस ने कथित अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया है। कुछ रिपोर्टों में लाइसेंसी शराब कारोबारियों और अन्य संदिग्धों के नाम भी जांच में सामने आने की बात कही गई है, हालांकि आरोपों और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच में होना बाकी है।
दिग्विजय सिंह ने कांड से प्रभावित चार परिवारों को गोद लेने की घोषणा भी की है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या EOW केवल आरोपों की जांच करेगी या शराब कारोबार, पुलिस-प्रशासन और कथित वसूली के पूरे नेटवर्क की आर्थिक कड़ियां भी सामने आएंगी?
सागर को अब तबादलों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा जवाब और जिम्मेदारी तय होने का इंतजार है।

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