याचिका में ‘नॉन-ऑब्स्टेन्ट’ क्लॉज पर सवाल, व्यक्तिगत कानूनों के साथ संभावित विसंगति का तर्क
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 की धारा 4 को चुनौती दी गई है। याचिका में इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए दावा किया गया है कि धारा में शामिल ‘नॉन-ऑब्स्टेन्ट’ क्लॉज व्यक्तिगत कानूनों के प्रावधानों के साथ संभावित विसंगतियां पैदा करता है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि स्पेशल मैरिज एक्ट अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि वाले बालिगों को अपने व्यक्तिगत कानून से अलग होकर नागरिक विवाह का कानूनी रास्ता देता है। लेकिन धारा 4 में इस्तेमाल की गई भाषा और उससे जुड़े प्रावधानों की व्याख्या व्यक्तिगत कानूनों के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर सकती है।
याचिका में अदालत से यह परीक्षण करने का आग्रह किया गया है कि संबंधित प्रावधान संविधान में मिले मौलिक अधिकारों और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप है या नहीं। हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी धारा 4 को असंवैधानिक घोषित नहीं किया है। केंद्र सरकार को नोटिस जारी होने के बाद अब उसका पक्ष सामने आएगा।
मामले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 उन नागरिकों के लिए वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराता है जो धार्मिक व्यक्तिगत कानून के बजाय इस कानून के तहत विवाह करना चाहते हैं। ऐसे में धारा 4 की संवैधानिक व्याख्या का असर विवाह की कानूनी पात्रता से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।
अब अगली सुनवाई में केंद्र सरकार के जवाब और याचिकाकर्ता की दलीलों के आधार पर अदालत यह तय करेगी कि इस चुनौती पर आगे किस तरह विचार किया जाए।

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