जबलपुर । अवैध उत्खनन से जुड़े मामले में मेसर्स आनंद माइनिंग कॉरपोरेशन को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली। कंपनी ने करीब 443 करोड़ रुपये की प्रस्तावित वसूली की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस वीपी शर्मा की युगलपीठ ने खारिज कर दिया। हालांकि अदालत ने जुर्माने को अंतिम रूप से तय नहीं किया है। कलेक्टर को सभी पक्षों को सुनकर चार महीने के भीतर प्रकरण का कानून के अनुसार निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर स्थित लौह अयस्क खदानों से संबंधित है। कंपनी के अनुसार दोनों क्षेत्रों में उसे वैध माइनिंग लीज मिली हुई है। टिकरिया की करीब 20.002 हेक्टेयर जमीन की लीज 1987 से 2037 तक और प्रतापपुर की 11.578 हेक्टेयर जमीन की लीज 1978 से 2028 तक बताई गई है।
इस पूरे प्रकरण का राजनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। सार्वजनिक न्यायिक रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों में भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक का नाम आनंद माइनिंग सहित कुछ खनन कंपनियों से जोड़ा गया है। हालांकि कंपनी पर प्रस्तावित वसूली और विधायक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को एक ही बात मानना उचित नहीं होगा; अंतिम प्रशासनिक निर्णय अभी बाकी है।
मामले में अब असली सवाल कलेक्टर की आगामी सुनवाई पर टिक गया है—क्या करीब 443 करोड़ की प्रस्तावित वसूली कायम रहती है, घटती है या प्रशासनिक सुनवाई के बाद कोई दूसरा फैसला होता है? चार महीने की समयसीमा में होने वाली कार्रवाई इस पूरे विवाद की अगली तस्वीर तय करेगी।

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