1 सितंबर से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को संतुलित और पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूक करना है। इस मौके पर अगर भारतीयों की थाली पर नजर डालें तो पिछले करीब 30 वर्षों में खाने-पीने की आदतों में बड़ा बदलाव दिखाई देता है।
करीब तीन दशक पहले ज्यादातर भारतीय घरों की थाली में स्थानीय और मौसम के अनुसार मिलने वाले खाद्य पदार्थ शामिल होते थे। रोटी, चावल, दाल, मौसमी सब्जियां, दही, छाछ और घर का बना खाना रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा था। गांवों और छोटे शहरों में ज्वार, बाजरा, रागी जैसे मोटे अनाज भी खूब खाए जाते थे। पैकेट बंद खाद्य पदार्थ और बाहर का खाना आज की तुलना में काफी कम था।
आज की भारतीय थाली में सुविधा और तेजी ने बड़ी जगह बना ली है। फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, मीठे पेय और बाहर से मंगाए जाने वाले भोजन का चलन बढ़ा है। हालांकि इसके साथ ही लोगों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है और ओट्स, सलाद, मल्टीग्रेन, मिलेट्स और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपनाने का रुझान भी दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली में सबसे जरूरी है कि हम पुराने भारतीय भोजन की अच्छी आदतों और आज की पोषण संबंधी जानकारी के बीच संतुलन बनाएं। दाल, सब्जियां, फल, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को थाली में शामिल करना बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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