इंदौर। उद्योग जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले नेमनाथ जैन की कहानी लंबे संघर्ष, मेहनत और कारोबारी दूरदृष्टि से जुड़ी है। रावलपिंडी से इंदौर आए नेमनाथ जैन ने कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी और पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए नौकरी भी की। करीब तीन दशक तक संघर्ष करने के बाद उन्होंने कारोबार की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
नेमनाथ जैन ने इंदौर को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार किया। इसी यात्रा में प्रेस्टीज ग्रुप एक बड़े कारोबारी समूह के रूप में स्थापित हुआ। समूह का कारोबार करीब 1000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया जाता है।
उनके जीवन की खास बात यह रही कि कारोबारी सफलता के बावजूद शिक्षा और सामाजिक योगदान से उनका जुड़ाव बना रहा। संघर्ष के दौर में पढ़ाई के लिए नौकरी करने से लेकर बड़े कारोबारी समूह के निर्माण तक का उनका सफर कई लोगों के लिए प्रेरणा का विषय रहा।
उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। 2021 में राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके कारोबारी और सामाजिक योगदान की सार्वजनिक मान्यता के रूप में देखा गया।
रावलपिंडी से इंदौर तक का उनका सफर केवल एक कारोबारी सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर की भी कहानी है जब सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा हासिल कर आगे बढ़ने और अपने दम पर उद्योग खड़ा करने की चुनौती सामने थी। आज नेमनाथ जैन का नाम इंदौर के प्रमुख उद्योगपतियों में लिया जाता है।

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