नई दिल्ली। एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रिया का मामला अब और दिलचस्प हो गया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) ने इस मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय विशेष पीठ गठित की है। यह कदम उस समय उठाया गया है, जब पहले की पीठ में करीब ₹22,006 करोड़ के दावों के मुकाबले सिर्फ ₹6.25 करोड़ के पुनर्भुगतान प्रस्ताव पर बहुमत की राय नहीं बन सकी।
मामले में सुभाष चंद्रा की ओर से पेश पुनर्भुगतान योजना के तहत लेनदारों को करीब ₹6.25 करोड़ मिलने का प्रस्ताव है। यह राशि स्वीकार किए गए करीब ₹22,006.57 करोड़ के दावों की तुलना में बेहद कम है। इसी वजह से इस योजना को लेकर वित्तीय संस्थानों और लेनदारों के बीच गंभीर सवाल उठे हैं।
पहले दो सदस्यीय पीठ में दोनों सदस्यों की राय अलग-अलग रही। इसके बाद तीसरे सदस्य की स्वतंत्र राय के बावजूद स्पष्ट बहुमत नहीं बन सका। नतीजतन मामला बड़े स्तर की पीठ के सामने भेजा गया है, ताकि इस महत्वपूर्ण विवाद पर निर्णायक राय सामने आ सके।
इस मामले का असर सिर्फ सुभाष चंद्रा तक सीमित नहीं है। व्यक्तिगत गारंटी, कर्ज वसूली और दिवालियापन कानून के तहत बड़े कर्जदारों से वसूली की प्रक्रिया पर भी इस फैसले की नजर रहेगी।
मामले में एनसीएलएटी में अपील भी दायर की गई है, जिससे अब यह विवाद और महत्वपूर्ण हो गया है।
**यानी ₹22 हजार करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.25 करोड़ की योजना पर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है—अब पांच सदस्यीय पीठ की राय पर सबकी नजर है।**

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