अगस्त 2026 में देश का सकल जीएसटी संग्रह 1,99,853 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल अगस्त में यह 1,74,116 करोड़ रुपये था, यानी सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। आंकड़ा बड़ा है, लेकिन इसके पीछे सिर्फ एक वजह तलाशना सही तस्वीर नहीं दिखाता।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि घरेलू जीएसटी राजस्व की वृद्धि 9.3 प्रतिशत रही, जबकि आयात से मिलने वाले जीएसटी में 29 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया। यानी कुल संग्रह बढ़ाने में आयात से जुड़े कर राजस्व की भूमिका काफी बड़ी रही। रिफंड के बाद सरकार का शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.68 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है।
यहीं सरकार के जीएसटी सुधारों की असली परीक्षा शुरू होती है। कर ढांचे में बदलाव का उद्देश्य अनुपालन आसान करना, कारोबार को राहत देना और खपत को बढ़ावा देना था। लेकिन अगस्त के आंकड़े यह भी बताते हैं कि बढ़ता संग्रह केवल सुधारों की वजह से नहीं, बल्कि आयात और आर्थिक गतिविधियों की मजबूती से भी जुड़ा है।
इसलिए 2 लाख करोड़ के करीब पहुंचा जीएसटी संग्रह निश्चित तौर पर सरकार के लिए राहत की खबर है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब करदाताओं पर बोझ बढ़ाए बिना यह रफ्तार लगातार बनी रहे। आंकड़ा चमकदार है, अब सरकार को यह साबित करना है कि सुधार का फायदा सिर्फ खजाने तक नहीं, बाजार और आम उपभोक्ता तक भी पहुंच रहा है।

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