ग्वालियर/भोपाल। मध्यप्रदेश में फर्जी पासपोर्ट के जरिए कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाने के मामले में जांच की दिशा अब डबरा के एक बुद्ध विहार तक पहुंच गई है। एसटीएफ की पड़ताल में सामने आया है कि सिमरिया टेकरी क्षेत्र से जुड़े बुद्ध विहार के पते पर 17 पासपोर्ट तैयार किए गए। जांचकर्ताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक ही पते पर इतने आवेदन कैसे स्वीकार हुए और उनका सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
मामले में भोपाल से गिरफ्तार पासपोर्ट एजेंट नसीम अख्तर की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। दो दिन की रिमांड के बाद उसे जेल भेजा जा चुका है। उसके लैपटॉप से मिले डिजिटल रिकॉर्ड, आवेदन और दस्तावेजों की जांच के आधार पर एसटीएफ अब इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। सामने आया है कि इनमें से पांच पासपोर्ट भोपाल से बनवाने में नसीम की भूमिका थी, जबकि बैतूल में भी पांच संदिग्ध पासपोर्ट के मामले में उसका नाम जांच से जुड़ा है।
जांच का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू मोबाइल नंबर और पहचान दस्तावेज हैं। आवेदन में दर्ज कुछ मोबाइल नंबर कथित रूप से वास्तविक आवेदकों के नहीं पाए गए। सवाल यह भी है कि यदि आवेदक वास्तव में डबरा के निवासी नहीं थे तो पुलिस वेरिफिकेशन में उनका पता कैसे सही पाया गया?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ वर्ष पहले बुद्ध विहार में बाहरी लोग आकर ठहरते थे। अब एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि वे कौन थे और उनका पासपोर्ट दस्तावेजों से क्या संबंध था।
जांच अभी जारी है। इसलिए संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका को अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोप या जांच के दायरे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। असली तस्वीर दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और सत्यापन प्रक्रिया की जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।

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