सागर । समर्थन मूल्य पर किसानों से मक्का खरीदी की सरकारी व्यवस्था में सागर जिले से कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 343 मीट्रिक टन मक्का की खरीदी दिखाकर 17 किसानों के खातों में ₹76.31 लाख का भुगतान कराया गया। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
प्रारंभिक जांच में सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी मात्रा में मक्का वास्तव में खरीदा ही नहीं गया, तो सरकारी रिकॉर्ड में 343 मीट्रिक टन उपज की एंट्री कैसे हुई और उसके आधार पर भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर पूरी हुई। किसानों के बैंक खातों में राशि पहुंचने से पहले खरीद केंद्र, दस्तावेजों और सत्यापन से जुड़ी कई प्रक्रियाएं होती हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने केवल कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले व्यक्ति की भूमिका नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की जवाबदेही तय करने की चुनौती है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे 19 सितंबर तक रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ में खरीद रिकॉर्ड, किसानों के दस्तावेज, भुगतान प्रक्रिया और कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ₹76.31 लाख का भुगतान आखिर किस आधार पर स्वीकृत हुआ? यदि जांच में फर्जी खरीद की पुष्टि होती है तो सरकारी खरीद व्यवस्था में दस्तावेजों के सत्यापन और भुगतान से पहले की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। पुलिस की आगे की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जीवाड़े की जिम्मेदारी कितने लोगों तक जाती है और सरकारी धन की वसूली कैसे होगी।

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