हिमालयी क्षेत्र में अगस्त 2026 के दौरान 130 से ज्यादा भूकंपीय घटनाएं दर्ज होने की रिपोर्ट ने एक बार फिर इस संवेदनशील इलाके की चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में लगातार छोटे-बड़े झटके दर्ज किए गए। हिमालय दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में है, क्योंकि भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट की ओर बढ़ रही है और इसी भूगर्भीय दबाव से भूकंप का खतरा बना रहता है।
लेकिन 130 से ज्यादा झटकों का मतलब यह नहीं कि कोई बड़ा भूकंप निश्चित रूप से आने वाला है। वैज्ञानिकों के लिए असली चुनौती इन घटनाओं के पैटर्न को समझना है। कई छोटे भूकंप सामान्य भूगर्भीय गतिविधि का हिस्सा होते हैं और जरूरी नहीं कि वे किसी बड़े भूकंप की भविष्यवाणी करें।
भारत के लिए चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि हिमालयी पट्टी के आसपास जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और पूर्वोत्तर के बड़े हिस्से भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील हैं। यहां तेजी से बढ़ते शहर, पहाड़ी ढलानों पर निर्माण और कमजोर ढांचागत व्यवस्था खतरे को और गंभीर बना सकती है।
सबसे बड़ा सवाल भूकंप के झटकों की संख्या नहीं, हमारी तैयारी है। अगर हिमालयी क्षेत्र में कभी बड़ा भूकंप आता है तो क्या पहाड़ी शहरों की इमारतें उसका सामना कर पाएंगी? क्या अस्पताल, सड़कें और पुल सुरक्षित रहेंगे?
वैज्ञानिक भूकंप की सटीक तारीख बताने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए डर फैलाने के बजाय जरूरी है कि चेतावनी तंत्र, भवन निर्माण नियम और आपदा तैयारी को गंभीरता से लिया जाए। हिमालय कांप रहा है या नहीं, लेकिन लापरवाही जरूर नहीं कांपनी चाहिए।

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