दिनभर थकान रहना, शरीर में कमजोरी महसूस होना, हाथ-पैरों में झनझनाहट या हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द—इन लक्षणों को लोग अक्सर काम के दबाव या बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई मामलों में इनके पीछे विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी हो सकती है।
विटामिन बी12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसकी कमी से कमजोरी, थकान, जीभ में परेशानी और हाथ-पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट जैसे लक्षण हो सकते हैं। लंबे समय तक गंभीर कमी रहने पर नसों को नुकसान भी हो सकता है।
वहीं विटामिन डी शरीर को कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है और हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और बच्चों में हड्डियों के विकास से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
भारत में विटामिन डी की कमी का एक कारण पर्याप्त धूप न मिलना हो सकता है। घर या कार्यालय में लंबे समय तक रहना, त्वचा को पूरी तरह ढककर रखना और जीवनशैली में बदलाव भी असर डाल सकते हैं। बी12 की कमी का खतरा उन लोगों में बढ़ सकता है जिनके भोजन में इसके प्राकृतिक स्रोत पर्याप्त नहीं हैं या जिनके शरीर में इसका अवशोषण ठीक से नहीं हो रहा।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लगातार कमजोरी या दर्द होने पर खुद से सप्लीमेंट शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलाह और जरूरत पड़ने पर जांच कराई जाए। संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार ही कमी को सुरक्षित तरीके से पूरा करने का बेहतर रास्ता है।

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