नई दिल्ली। किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी से खेती के लिए कर्ज लेने वाले किसानों को मिलने वाली ब्याज राहत में बदलाव की तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार बैंकों के साथ ब्याज सब्सिडी में 50 आधार अंक यानी 0.50 प्रतिशत की कटौती पर चर्चा कर रही है। यह प्रस्ताव अभी विचार-विमर्श के स्तर पर है, अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
मौजूदा व्यवस्था में सरकार संशोधित ब्याज सहायता योजना के तहत बैंकों को 1.5 प्रतिशत ब्याज सहायता देती है। इसके चलते पात्र अल्पकालिक कृषि ऋण पर किसानों के लिए ब्याज दर 7 प्रतिशत रखी जाती है। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 3 प्रतिशत की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिलती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर 4 प्रतिशत तक आ जाती है।
सरकार की ओर से प्रस्तावित 0.50 प्रतिशत कटौती को हाल में हुई नीतिगत दरों में कमी के अनुरूप ब्याज सहायता को समायोजित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय होने तक यह स्पष्ट नहीं है कि इसका किसानों की प्रभावी ब्याज दर पर कितना असर पड़ेगा।
महत्वपूर्ण यह भी है कि केंद्र ने पहले ही केसीसी के तहत संशोधित ब्याज सहायता योजना की ऋण सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। वर्ष 2026-27 के बजट दस्तावेज में इस योजना के लिए 22,600 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान भी दर्ज है।
अगर ब्याज सहायता घटती है और उसका पूरा लाभ बैंक दरों में कमी के रूप में किसानों तक नहीं पहुंचता, तो समय पर भुगतान न करने वाले किसानों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ सकता है। इसलिए सरकार के अंतिम फैसले में किसान की वास्तविक ब्याज दर और समय पर भुगतान करने वालों को मिलने वाली राहत पर विशेष नजर रहेगी।

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