पुणे के गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। अदालत ने दुकान का लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई को पलटते हुए संचालकों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। फैसले पर महाराष्ट्र के एफडीए आयुक्त और आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अदालत के आदेश से हैरान हैं।
मामला खाद्य सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर एफडीए की कार्रवाई से जुड़ा था। विभाग ने दुकान का लाइसेंस निलंबित किया था, जिसके खिलाफ संचालकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए और लाइसेंस निलंबन के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने दुकान संचालकों को हुए नुकसान के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
अदालत के फैसले के बाद एफडीए की कार्रवाई और उसके पीछे अपनाई गई प्रक्रिया पर बहस शुरू हो गई है। दूसरी ओर, मुंढे ने फैसले पर आश्चर्य जताते हुए विभाग के पक्ष की ओर भी संकेत किया है।
यह मामला अब सिर्फ एक दुकान की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि खाद्य सुरक्षा कानूनों को लागू करते समय विभागीय अधिकारियों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया कितनी स्पष्ट और न्यायिक कसौटी पर टिकाऊ है।
हालांकि, हाई कोर्ट के फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और एफडीए की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। मामले में अदालत के आदेश के अंतिम प्रभाव को संबंधित पक्षों की अगली कार्रवाई से समझा जाएगा।

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