ई20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों की बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने तस्वीर साफ करने की कोशिश की है। सरकार का कहना है कि माइलेज में कमी के लिए केवल ई20 पेट्रोल को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। वाहन की स्थिति, चालक की आदत, सड़क और यातायात की स्थिति, टायरों का दबाव, रखरखाव और एसी का इस्तेमाल भी ईंधन खपत पर असर डालते हैं।
ई20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार के अनुसार एथेनॉल का ऊष्मीय मान पेट्रोल से कम है, इसलिए कुछ परिस्थितियों में ईंधन दक्षता पर मामूली असर पड़ सकता है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने परीक्षणों के आधार पर ई20 वाहनों में ईंधन दक्षता में लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक का अंतर बताया है।
वहीं सोशल मीडिया पर ई20 से 30 प्रतिशत माइलेज घटने का दावा भी सामने आया है। सरकार का कहना है कि 30 प्रतिशत का आंकड़ा एथेनॉल के कम ऊष्मीय मान की तुलना से जुड़ा है, इसे वास्तविक परिस्थितियों में वाहन के माइलेज में 30 प्रतिशत गिरावट नहीं माना जा सकता।
तेल में पानी की मिलावट के दावों पर भी सरकार ने व्यापक समस्या से इनकार किया है। पेट्रोल की गुणवत्ता पर देशभर के करीब 90 हजार पेट्रोल पंपों पर निरीक्षण किए जाने की जानकारी दी गई है।
सरकार का संदेश साफ है—माइलेज जांचते समय केवल पेट्रोल को नहीं, गाड़ी की हालत, टायर, एसी और ड्राइविंग तरीके को भी देखना होगा।

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