नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक पॉडकास्ट में ‘CJP’ से जुड़े लोगों की राजनीतिक भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि CJP के संस्थापक राजनीतिक दल बनाते हैं तो वह उनका समर्थन करेंगे। वांगचुक के मुताबिक, संगठन से जुड़े लोगों में राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं मौजूद हैं।
वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन गतिविधियों को देखकर उन्हें लगा कि संगठन के लोगों की रुचि राजनीति में भी है। उन्होंने यह भी कहा कि CJP के संस्थापक कोई संत नहीं हैं और उन्हें भी राजनीति में आने तथा राजनीतिक विकल्प बनाने का अधिकार है।
उनके बयान ने सामाजिक आंदोलनों और सक्रिय राजनीति के बीच संबंध को लेकर बहस छेड़ दी है। आमतौर पर सामाजिक आंदोलनों से जुड़े समूह खुद को राजनीतिक दलों से अलग रखते हैं, लेकिन जब आंदोलन व्यापक जनसमर्थन हासिल करते हैं तो उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है।
वांगचुक का कहना है कि यदि CJP के लोग राजनीतिक दल बनाकर चुनावी मैदान में उतरते हैं तो वह उनके साथ खड़े होंगे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका समर्थन किसी संगठन की मौजूदा गतिविधियों से अधिक उसके संभावित राजनीतिक फैसले पर निर्भर करेगा।
जंतर-मंतर के प्रदर्शनों के संदर्भ में आया यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली के राजनीतिक मंच पर नए राजनीतिक विकल्पों की संभावनाएं हमेशा चर्चा में रहती हैं।
अब सवाल यह है कि क्या सामाजिक आंदोलन से जुड़े चेहरे वास्तव में राजनीतिक दल बनाने की दिशा में बढ़ेंगे, या यह सिर्फ राजनीतिक असंतोष को लेकर हुई चर्चा तक सीमित रहेगा? आने वाले समय में तस्वीर साफ हो सकती है।

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