नई दिल्ली। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले पेयजल की गुणवत्ता पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के बाद रेल मंत्रालय ने बड़ा सुधार अभियान शुरू किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर सुरक्षित पेयजल के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
रेलवे के अनुसार देशभर में करीब 20 हजार स्थानों, जिनमें पानी के कूलर भी शामिल हैं, पर नया ‘टैंक से नल तक’ जल शोधन और निगरानी तंत्र लगाया जाएगा। इसके साथ पुराने पानी के टैंकों को बदलने, जल स्रोत और निकासी बिंदु दोनों पर नियमित जांच कराने तथा भंडारण टैंकों की तय समय पर सफाई और रखरखाव के निर्देश दिए गए हैं।
सीएजी की हालिया जांच में पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर कमियां सामने आई थीं। रिपोर्ट के अनुसार जांच किए गए 49 स्टेशनों में से 8 के पानी के नमूनों में ई-कोलाई पाया गया। कई स्थानों पर जल गुणवत्ता की निर्धारित जांच नियमित रूप से नहीं हो रही थी और परीक्षण उपकरणों की भी कमी सामने आई।
अब रेलवे बोर्ड सीधे इस अभियान की निगरानी करेगा। मंत्रालय ने जल गुणवत्ता की जांच, जिम्मेदारी तय करने और अनुपालन की केंद्रीकृत निगरानी पर जोर दिया है। प्रगति और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्ट समय-समय पर सार्वजनिक करने की भी बात कही गई है।
सीएजी की आपत्तियों के बाद रेलवे की यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे स्टेशनों पर रोज लाखों यात्री पेयजल सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं। अब असली चुनौती यह होगी कि घोषित सुधार केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि हर स्टेशन पर साफ और सुरक्षित पानी वास्तव में उपलब्ध हो।

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