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तनाव में बार-बार पेशाब क्यों आती है? दिमाग और ब्लैडर के बीच है सीधा संबंध

 

कभी किसी जरूरी काम, परीक्षा, इंटरव्यू या तनावपूर्ण स्थिति से ठीक पहले बार-बार पेशाब लगना आपको अजीब लग सकता है। लेकिन यह केवल वहम नहीं है। तनाव और घबराहट शरीर के तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करते हैं और इसका असर मूत्राशय की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है। शोध में लंबे समय के मनोवैज्ञानिक तनाव और पेशाब की बार-बार इच्छा, अचानक तेज पेशाब लगना तथा मूत्राशय की संवेदनशीलता के बीच संबंध पाया गया है। 



दिमाग और ब्लैडर कैसे जुड़े हैं?


मूत्राशय का नियंत्रण केवल स्थानीय मांसपेशियों से नहीं होता। दिमाग, रीढ़ की हड्डी और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र मिलकर यह तय करते हैं कि मूत्राशय कब भर रहा है और कब पेशाब करने की जरूरत है। Nature Reviews Neuroscience में प्रकाशित समीक्षा के अनुसार, मस्तिष्क से लेकर रीढ़ की हड्डी और परिधीय नसों तक फैला जटिल तंत्र पेशाब को नियंत्रित करता है। 


तनाव की स्थिति में शरीर का तनाव-तंत्र सक्रिय होता है। शोध के अनुसार तनाव से जुड़े रासायनिक संकेत और कॉट्रिकोट्रोपिन-रिलीजिंग फैक्टर (CRF) जैसे तंत्र मस्तिष्क और मूत्राशय के बीच संचार को प्रभावित कर सकते हैं। इससे कुछ लोगों में ब्लैडर ज्यादा संवेदनशील महसूस हो सकता है और थोड़ी मात्रा में पेशाब होने पर भी तेज इच्छा पैदा हो सकती है। 


हर बार वजह तनाव नहीं होती


बार-बार पेशाब आना मूत्र संक्रमण, मधुमेह, अधिक पानी या कैफीन का सेवन, ओवरएक्टिव ब्लैडर, कुछ दवाओं और पुरुषों में बढ़े हुए प्रोस्टेट जैसी कई वजहों से भी हो सकता है। 


अगर पेशाब के साथ जलन, खून, बुखार, कमर या बगल में दर्द, बहुत ज्यादा प्यास या लगातार रात में पेशाब के लिए उठना हो, तो इसे केवल तनाव मानकर न छोड़ें और डॉक्टर से जांच कराएं। 


निष्कर्ष: तनाव में बार-बार पेशाब लगना शरीर की वास्तविक प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन लगातार या नए तरीके से शुरू हुए लक्षणों में दूसरी चिकित्सकीय वजहों को जांचना जरूरी है।

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