हिचकी आमतौर पर कुछ मिनटों में अपने-आप ठीक हो जाती है। यह डायफ्राम की अचानक और अनैच्छिक ऐंठन के कारण होती है। जल्दी-जल्दी खाना, ज्यादा खाना, गैस वाले पेय, बहुत गर्म या ठंडा भोजन और शराब जैसी चीजें सामान्य हिचकी को ट्रिगर कर सकती हैं।
लेकिन अगर हिचकी 48 घंटे से ज्यादा लगातार बनी रहे, तो इसे सामान्य मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। चिकित्सा साहित्य में ऐसी हिचकी को Persistent Hiccups कहा जाता है। एक महीने से अधिक चलने वाली हिचकी को Intractable Hiccups माना जाता है।
दिमाग और तंत्रिका तंत्र से क्या संबंध?
हिचकी से जुड़ा तंत्रिका मार्ग डायफ्राम, फ्रेनिक नर्व, वेगस नर्व और मस्तिष्क के ब्रेनस्टेम से जुड़ा होता है। इसलिए इस मार्ग में गड़बड़ी होने पर लंबे समय तक हिचकी आ सकती है। शोधों में स्ट्रोक, मल्टीपल स्केलेरोसिस, ब्रेनस्टेम की बीमारी, संक्रमण और अन्य तंत्रिका संबंधी समस्याओं को लंबे समय तक चलने वाली हिचकी के संभावित कारणों में शामिल किया गया है।
हालांकि हर बार बार-बार आने वाली हिचकी का मतलब दिमाग की बीमारी नहीं होता। लगातार हिचकी का सबसे आम कारणों में गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स (जीईआरडी) भी शामिल है। इसके अलावा फेफड़ों की बीमारी, कुछ दवाएं और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट या अन्य चयापचय संबंधी गड़बड़ियां भी कारण हो सकती हैं।
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
अगर हिचकी के साथ चक्कर, कमजोरी, बोलने में परेशानी, चेहरे या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन/कमजोरी, तेज सिरदर्द, चलने में असंतुलन या सांस लेने में परेशानी हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें। ये लक्षण गंभीर तंत्रिका या अन्य आपात स्थिति की ओर संकेत कर सकते हैं।
निष्कर्ष: कभी-कभार आने वाली हिचकी आमतौर पर चिंता की बात नहीं है, लेकिन 48 घंटे से अधिक चलने वाली या बार-बार लौटने वाली हिचकी की चिकित्सकीय जांच जरूरी है। कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार रक्त जांच, छाती की जांच या मस्तिष्क की इमेजिंग जैसी जांच करा सकते हैं।

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