भोपाल। राजधानी के इतवारा रोड स्थित ‘नन्हे चाचा दूध डेयरी’ के दूध के नमूने में डिटर्जेंट की मौजूदगी पाए जाने के बाद खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में मिश्रित दूध का नमूना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से असुरक्षित घोषित किया गया है।
रोजाना करीब 300 लीटर दूध की बिक्री का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक डेयरी से प्रतिदिन करीब 300 लीटर दूध बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। नमूने की जांच में डिटर्जेंट मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए डेयरी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
दूध में डिटर्जेंट मिलना कितना गंभीर?
दूध में किसी भी गैर-अनुमत रासायनिक पदार्थ की मिलावट उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला है। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत दूध और दुग्ध उत्पादों को निर्धारित गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना जरूरी है।
पहली बार सामने आया ऐसा मामला?
स्थानीय रिपोर्ट में इसे भोपाल में दूध में डिटर्जेंट की मौजूदगी का गंभीर मामला बताया गया है। हालांकि, ‘भोपाल में पहली बार’ होने के दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक विभागीय आंकड़े उपलब्ध होना जरूरी है; इसलिए इसे अंतिम तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता।
अब बड़ा सवाल—कितने लोग पी रहे थे यह दूध?
यदि डेयरी से वास्तव में प्रतिदिन सैकड़ों लीटर दूध की बिक्री हो रही थी, तो जांच का दायरा केवल डेयरी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अधिकारियों को यह भी पता लगाना होगा कि दूध कहां-कहां सप्लाई किया गया, मिलावट कब से हो रही थी और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।
सबसे अहम सवाल यही है—खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी से बचकर असुरक्षित दूध बाजार तक कैसे पहुंचा? मामले में प्राथमिकी और आगे की जांच से इसकी पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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