ठेकेदारों के नाम सामने आ गए, सीएजी की आपत्तियां सामने आ गईं—अब मुख्यमंत्री मोहन यादव बताएं, कार्रवाई कब?
प्रणव बजाज
चार एपिसोड तक हमने मध्यप्रदेश की सड़क व्यवस्था की उन परतों को सामने रखा, जिनमें निविदा से लेकर ठेका, गुणवत्ता जांच, भुगतान और जिम्मेदारी तक कई सवाल खड़े हुए।
सीएजी की रिपोर्ट ने काली सूची वाले ठेकेदारों को काम मिलने, निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ियों, कमजोर निर्माण, अतिरिक्त भुगतान और विभागीय निगरानी की कमियों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट की जांच अवधि 2018-19 से 2022-23 रही और इसे 20 फरवरी 2026 को विधानसभा में रखा गया।
अब इस श्रृंखला को आगे खींचने का कोई मतलब नहीं।
अब सवाल है—कार्रवाई कौन करेगा?
ठेकेदारों पर जांच हो
सीएजी में जिन ठेकेदारों और कंपनियों के मामले सामने आए हैं, उनमें—
केतन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड
वीरेंद्र रघुवंशी
बंसल कंस्ट्रक्शन वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड
पी.डी. अग्रवाल
राम प्रकाश गुप्ता
के मामलों पर विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर जांच होनी चाहिए।
लेकिन जांच का अर्थ पहले से दोषी घोषित करना नहीं है।
जिसके खिलाफ सीएजी की आपत्ति है, उसे नोटिस दो।
उसका पक्ष लो।
रिकॉर्ड जांचो।
जिम्मेदारी तय करो।
और यदि नियमों का उल्लंघन सिद्ध हो तो—
ठेका निरस्त करो।
राशि की वसूली करो।
दंड लगाओ।
काली सूची में डालो।
और जहां आपराधिक कृत्य के प्रमाण मिलें, वहां कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई भी हो।
सिर्फ ठेकेदार क्यों?
यह सबसे बड़ा सवाल है।
सीएजी ने 11 सड़क कार्यों में मानक से कम पीक्यूसी और डीएलसी के बावजूद भुगतान होने से 6.43 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान की बात कही है।
79 सड़क कार्यों में प्रयोगशालाओं की स्थापना में देरी के मामलों में 5.28 करोड़ रुपये के दंड की वसूली का मुद्दा उठाया गया।
और कई मामलों में निगरानी, परीक्षण, भुगतान तथा समय-विस्तार की प्रक्रिया पर सवाल उठे।
तो फिर केवल ठेकेदार पर कार्रवाई से काम कैसे चलेगा?
जिसने गुणवत्ता प्रमाणित की, उसकी भी जांच हो।
जिसने माप दर्ज किया, उसकी भी जांच हो।
जिसने भुगतान की अनुशंसा की, उसकी भी जांच हो।
जिस अधिकारी ने नियमों की अनदेखी की, उसकी भी जवाबदेही तय हो।
सीएजी ने खुद सरकार से ऐसी स्वतंत्र समिति बनाने की सिफारिश की है, जो सरकारी खजाने को हुए नुकसान, अतिरिक्त भुगतान, घटिया काम और अन्य चूकों की जांच करके जिम्मेदारी तय करे। रिपोर्ट में ठेकेदारों के साथ प्राधिकरण अभियंताओं पर भी दंड की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव से सीधे सवाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बौद्धिक प्रतिकार के पांच सवाल—
पहला— सीएजी की आपत्तियों वाले सभी ठेकेदारों की सूची बनाकर जांच कब शुरू होगी?
दूसरा— 6.43 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान की वसूली कब होगी?
तीसरा— संभावित दंड और अन्य वित्तीय नुकसान की जिम्मेदारी किस पर तय होगी?
चौथा— गुणवत्ता प्रमाणित करने वाले अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच होगी या नहीं?
पांचवां— क्या सरकार सीएजी की सिफारिश के अनुसार स्वतंत्र समिति बनाकर पूरी ठेका व्यवस्था की जांच कराएगी?
अब फैसला सरकार को करना है
सड़क जनता के पैसे से बनती है।
ठेका सरकार देती है।
गुणवत्ता सरकारी व्यवस्था जांचती है।
माप सरकारी कर्मचारी दर्ज करते हैं।
भुगतान सरकारी खजाने से होता है।
इसलिए सड़क खराब हो तो जिम्मेदारी केवल ठेकेदार की नहीं हो सकती।
ठेकेदार दोषी है तो कार्रवाई हो।
अधिकारी दोषी है तो कार्रवाई हो।
किसी स्तर पर मिलीभगत सिद्ध होती है तो कानून के मुताबिक कठोर कार्रवाई हो।
और अगर किसी पर आरोप सिद्ध नहीं होते तो उसे भी बेवजह दोषी न बनाया जाए।
यही निष्पक्ष जांच है।
यही जवाबदेही है।
बौद्धिक प्रतिकार की अंतिम मांग
मुख्यमंत्री मोहन यादव जी—
सीएजी की रिपोर्ट अब विधानसभा के सामने है।
नाम सामने हैं।
आंकड़े सामने हैं।
आपत्तियां सामने हैं।
अब जनता को एक और रिपोर्ट नहीं चाहिए।
जनता को कार्रवाई चाहिए।
सभी संबंधित ठेकेदारों की जांच हो।
सभी संबंधित अधिकारियों की भूमिका जांची जाए।
सरकारी नुकसान की वसूली हो।
दोष सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई हो।
और पूरी जांच की कार्रवाई सार्वजनिक की जाए।
क्योंकि सड़क टूटती है तो जनता चलती है...
पैसा जाता है तो जनता का जाता है...
अब जवाबदेही भी जनता के सामने होनी चाहिए।
यहीं समाप्त होती है बौद्धिक प्रतिकार की सड़क घोटाला पड़ताल।
अब अगला कदम सरकार का है।
बौद्धिक प्रतिकार — सवाल जनता के, जवाब सरकार के।

Post a Comment