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ओंकारेश्वर वन्यजीव अभयारण्य की अधिसूचना में देरी पर हाईकोर्ट सख्त

जनहित याचिका पर स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड को नोटिस, पूछा—क्यों अटका है अभयारण्य का दर्जा?



इंदौर। ओंकारेश्वर क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने में हो रही देरी को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड, भोपाल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।


याचिका में ओंकारेश्वर क्षेत्र के वन और वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष सवाल रखा गया कि यदि क्षेत्र को वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया जाना प्रस्तावित है, तो प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं हुई।


हाईकोर्ट ने मांगा जवाब


सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित प्राधिकरण से यह स्पष्ट करने को कहा कि ओंकारेश्वर वन्यजीव अभयारण्य को अधिसूचित करने की प्रक्रिया में आखिर देरी किस स्तर पर हो रही है। अदालत के नोटिस के बाद अब स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड को इस संबंध में अपना पक्ष रखना होगा।


संरक्षण बनाम विकास का सवाल


ओंकारेश्वर क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक और वन्यजीव संपदा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के बीच वन क्षेत्र और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।


ऐसे में हाईकोर्ट की दखल के बाद निगाहें अब राज्य सरकार और स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड के जवाब पर रहेंगी। सवाल यह भी है कि जिस क्षेत्र के संरक्षण के लिए अधिसूचना जरूरी मानी जा रही है, उसकी प्रक्रिया वर्षों तक क्यों लंबित रही और इसके दौरान पर्यावरणीय संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए?

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