सरकारी जमीन पर कब्जा पहले रोकना था या अब कर वसूली का रास्ता खोलना? निगम की नीति पर उठे सवाल
इंदौर। आर्थिक संकट से जूझ रहे इंदौर नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए तैयार किए जा रहे एक प्रस्ताव ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रस्ताव के तहत सरकारी और नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण कर रहने या कारोबार करने वालों के नाम से संपत्तिकर खाते खोलकर उनसे कर वसूलने की योजना बताई जा रही है। निगम की दलील है कि संपत्तिकर वसूलने से संबंधित व्यक्ति को जमीन या भवन का मालिकाना हक नहीं मिलेगा और अतिक्रमण वैध नहीं माना जाएगा।
लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है—यदि कब्जा अवैध है तो नगर निगम उसके नाम पर संपत्ति का कर खाता क्यों खोलेगा?
मध्यप्रदेश नगर निगम अधिनियम में संपत्तिकर की प्राथमिक जिम्मेदारी संपत्ति के मालिक पर निर्धारित है। कुछ परिस्थितियों में अधिभोगी से भी कर की वसूली का प्रावधान है। दूसरी ओर, अधिनियम की धारा 83 के तहत निगम को अपनी अचल संपत्तियों का रिकॉर्ड रखने, उनकी सुरक्षा करने और अतिक्रमण मिलने पर उसे हटाने के लिए कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।
यही प्रावधान प्रस्ताव को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है। निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी अतिक्रमण रोकना और हटाना है या अतिक्रमणकारी से कर वसूलकर राजस्व बढ़ाना?
जनता का सवाल—कब्जा हुआ कैसे?
शहर में लंबे समय से सरकारी और निगम की जमीन पर कब्जे को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में नागरिकों का सवाल है कि यदि किसी जमीन पर अवैध निर्माण या कब्जा हुआ, तो शुरुआती स्तर पर निगम के संबंधित अमले ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
लोगों का दूसरा सवाल इससे भी गंभीर है—यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बाद में की जानी है, तो वर्षों तक संपत्तिकर खाते खोलकर कर वसूली करने का औचित्य क्या होगा? क्या इससे भविष्य में कब्जे को लेकर नए कानूनी विवादों का रास्ता नहीं खुलेगा?
हालांकि केवल संपत्तिकर खाता खोलना अपने आप में मालिकाना हक देने के बराबर नहीं है, लेकिन कर निर्धारण और संपत्ति के वैध स्वामित्व को अलग-अलग कानूनी प्रश्न मानकर ही यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
कुछ करोड़ के राजस्व के लिए बड़ा जोखिम?
नगर निगम की माली हालत सुधारने के लिए नए राजस्व स्रोत तलाशना जरूरी हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि अतिक्रमण जैसी गंभीर समस्या को राजस्व के नजरिए से देखने पर कहीं मूल उद्देश्य ही कमजोर न हो जाए।
अगर निगम को वास्तव में अतिरिक्त राजस्व चाहिए तो पहले वैध संपत्तियों का कर आधार बढ़ाने, लंबे समय से बकाया कर की वसूली, गलत या अधूरे संपत्ति रिकॉर्ड दुरुस्त करने और निगम की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए।
प्रस्ताव से पहले सार्वजनिक जवाब जरूरी
एमआईसी में आने वाले प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय से पहले निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितने अतिक्रमणकारियों के खाते खोलने की योजना है, संभावित राजस्व कितना है, जमीन का स्वामित्व किसके नाम रहेगा, कर वसूली की कानूनी आधार व्यवस्था क्या होगी और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है—नगर निगम अतिक्रमण को खत्म करना चाहता है या अतिक्रमण से कमाई का नया रास्ता खोलना चाहता है?
प्रस्ताव पर फैसला लेने से पहले इन सवालों के सार्वजनिक जवाब जरूरी हैं।

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