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कमिश्नर के आदेश पर भी नहीं हुई एफआईआर!

 रसीद में ₹4520, निगम खाते में ₹3020 — नगर निगम के राजस्व विभाग में कथित गबन का बड़ा मामला

प्रणव बजाज 



इंदौर नगर निगम के राजस्व विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के एक गंभीर मामले ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आरोप है कि करदाताओं से वसूली गई राशि और निगम के ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज राशि में अंतर पाया गया। मामले में तत्कालीन निगम आयुक्त शिवम वर्मा द्वारा पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए जाने का भी दावा किया गया है, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई और संबंधित कर्मचारी बाद में फिर सेवा में लौट आया।

रसीद और ऑनलाइन रिकॉर्ड में ₹1500 का अंतर

दस्तावेजों के अनुसार, एक करदाता से ₹4520 की नकद वसूली की रसीद जारी की गई, जबकि उसी कनेक्शन के ऑनलाइन लेजर रिकॉर्ड में ₹3020 ही दर्ज दिखाई दिए। यदि यह अंतर जांच में सही पाया जाता है, तो यह राजस्व गबन का गंभीर मामला हो सकता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक जांच और अंतिम निष्कर्ष अभी शेष हैं।

तत्कालीन आयुक्त के निर्देशों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

दावे के अनुसार, शिकायतों की जांच के बाद संबंधित कर्मचारी की कर्मचारी पहचान (आईडी) लॉक कर उसे कार्यमुक्त किया गया था तथा संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। यदि यह तथ्य सही हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि आयुक्त के आदेश को किस स्तर पर रोका गया?

नियुक्ति और रिकॉर्ड पर भी सवाल

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड और सेवा लाभों में भी अनियमितताओं की आशंका है। इन दावों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

दोहरा मापदंड?

पूर्व में संपत्ति कर मामलों में राजस्व हानि के आरोपों पर निगम के 23 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। ऐसे में प्रश्न उठ रहा है कि यदि वर्तमान मामले में आरोप और दस्तावेज मौजूद हैं, तो समान कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

बौद्धिक प्रतिकार के सवाल

क्या तत्कालीन आयुक्त के एफआईआर संबंधी आदेश की अवहेलना हुई?

रसीद और ऑनलाइन लेजर में राशि का अंतर कैसे आया?

यदि राशि का अंतर सही है, तो जिम्मेदार कौन है?

क्या पूरे राजस्व विभाग का विशेष लेखा परीक्षण (ऑडिट) कराया जाएगा?

क्या संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?

क्या निगम इस मामले में सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करेगा?

नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप उपलब्ध दस्तावेजों और दावों पर आधारित हैं। इनकी अंतिम पुष्टि सक्षम जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी। संबंधित पक्ष का पक्ष प्रकाशित होने पर उसे भी प्रमुखता से स्थान दिया जाना चाहिए।

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