मौलाना जर्नीस अंसारी के बयान पर देशभर में आक्रोश, इंदौर में हरट-कारणी ने कहा—"असामाजिक तत्व पर हो कड़ी कार्रवाई"
प्रणव बजाज
उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी मौलाना जर्नीस अंसारी के एक कथित वीडियो में भगवान शंकर (महाकाल) के संबंध में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। विभिन्न हिंदू संगठनों ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इंदौर में भी इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
क्या है पूरा मामला
सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित वीडियो में मौलाना जर्नीस अंसारी पर भगवान शंकर के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। वीडियो सामने आने के बाद कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और विभिन्न संगठनों ने पुलिस में शिकायतें देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उसके पूरे संदर्भ की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।
इंदौर में हरट-कारणी का बयान
इंदौर के हरट-कारणी डॉ. मोहम्मद इसरार अली ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे किसी भी धर्म के आराध्य के अपमान का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और किसी को भी दूसरे धर्म की आस्था पर चोट पहुंचाने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास करे, उसके विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
चंदन नगर थाने पर प्रदर्शन
इंदौर के चंदन नगर थाना क्षेत्र में हिंदू संगठनों और कांवड़ यात्रियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मौलाना जर्नीस अंसारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस को ज्ञापन भी सौंपा गया।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि उपलब्ध वीडियो और शिकायतों के आधार पर वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाएगी।
आचार्य सुनील सागर महाराज ने क्या कहा
आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि सभी धर्मों का मूल संदेश शांति, सद्भाव और परस्पर सम्मान है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म के आराध्य के विरुद्ध अपमानजनक भाषा का प्रयोग समाज में तनाव पैदा करता है और इससे बचना चाहिए।
बौद्धिक प्रतिकार की पड़ताल
क्या वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी?
क्या कथित बयान भारतीय दंड संहिता/बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत अपराध बनता है?
क्या सभी पक्षों के बयान लेकर निष्पक्ष जांच की जाएगी?
क्या सोशल मीडिया पर धार्मिक विद्वेष फैलाने वालों के खिलाफ समान कार्रवाई होगी?
नोट: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने आए आरोपों, विरोध प्रदर्शनों और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है। कथित वीडियो की प्रामाणिकता तथा किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच एजेंसी और न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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