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जनता जनार्दन की अदालत में 'हार' की फाइल खुल गई!"

 


प्रणव बजाज

दृश्य:

भोपाल के बाहर एक बड़ा बोर्ड लगा है—"आत्ममंथन केंद्र"।

एक कमरे में कुर्सियां खाली हैं, मेज पर हार की रिपोर्ट रखी है। बाहर कार्यकर्ता पूछ रहे हैं—

"साहब, हार का जिम्मेदार कौन?"

अंदर से आवाज आती है—

"पहले रिपोर्ट बनेगी, फिर समिति बनेगी, फिर समीक्षा होगी..."

बाहर जनता मुस्कुराकर कहती है—

"मतदान हमने किया था, समीक्षा अब आप कर लीजिए।"

दूसरे कोने में एक नेता पूछता है—



"टिकट बदल दें?"


जवाब आता है—


"जनता ने तो पूरा मूड बदल दिया।"


तभी एक मतदाता बैलेट की स्याही दिखाकर कहता है—


"लोकतंत्र में आखिरी फैसला भाषण नहीं, बटन करता है।"


कैप्शन


"उपचुनाव छोटा था, लेकिन संदेश बड़ा छोड़ गया। अब सबसे बड़ा सवाल—हार से सबक कौन लेगा?"


यह व्यंग्य चुनावी परिणाम और सार्वजनिक राजनीतिक घटनाक्रम पर आधारित है तथा किसी अप्रमाणित आरोप को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।


*भाजपा के लिए खतरे की घंटी, सत्ता के अहंकार पर जनता का प्रहार*


भाजपा के लिए खतरे की घंटी, सत्ता के अहंकार पर जनता का प्रहार, *मोहन यादव से जनता त्रस्त हो गई है इसीलिए दतिया की सीट गई* यदि अभी चुनाव किया जाए तो कांग्रेस एक तरफा जीतेगी ..... यह जनता की राह है।जनता ने साफ संदेश दिया कि चुनाव केवल चेहरों से नहीं, कार्यकर्ताओं और बूथ तक की मजबूती से जीते जाते हैं।

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