संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने युद्ध और वैश्विक खाद्य सुरक्षा के बीच बढ़ते संबंध को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि आज के संघर्षों का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ऊर्जा, उर्वरक, समुद्री परिवहन और कृषि व्यापार की आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित करता है। इसका सबसे बड़ा बोझ खाद्य और आयात पर निर्भर विकासशील देशों को उठाना पड़ता है।
भारत ने सुरक्षा परिषद से संघर्षों के मानवीय दुष्परिणामों को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने, सुरक्षित और निर्बाध मानवीय सहायता पहुंच सुनिश्चित करने तथा महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सामूहिक कार्रवाई की अपील की। भारत ने स्पष्ट किया कि भोजन, उर्वरक और ईंधन की आवाजाही के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद समुद्री मार्ग बेहद जरूरी हैं।
इस बहस में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने बताया कि 2025 में कम से कम 26.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि 2025 में पहली बार इस सदी में सूडान और गाजा में एक साथ अकाल की पुष्टि हुई। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 13 सबसे गंभीर भूख संकटों में से 12 में संघर्ष और हिंसा प्रमुख कारण रहे।
भारत ने समाधान के तौर पर स्थानीय कृषि उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने, भंडारण और परिवहन व्यवस्था मजबूत करने तथा जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। संदेश साफ है—युद्ध केवल सीमाओं को नहीं जलाता, उसका असर दुनिया की थाली तक पहुंचता है।

Post a Comment