नई दिल्ली। केंद्र सरकार ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026’ संसद में पेश करने जा रही है। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य देश में निवेश को प्रोत्साहन देना, विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना और विदेशी निवेशकों के लिए कर संबंधी नियमों को अधिक सरल बनाना है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कर रियायतों की अवधि बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे भारत में उत्पादन, निर्यात और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा वैश्विक कंपनियों का निवेश आकर्षित होगा।
विधेयक में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और अन्य विदेशी निवेश फंडों के लिए कर अनुपालन संबंधी कुछ नियमों को सरल बनाने का भी प्रस्ताव है। इससे विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने और भारतीय वित्तीय बाजारों को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से 'मेक इन इंडिया' और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य को गति मिलेगी। हालांकि, प्रस्तावित प्रावधान लागू होने से पहले विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त करनी होगी।
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