भोपाल में स्कूली छात्रों ने अपने स्कूल के भविष्य को लेकर सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। केंद्रीय विद्यालय संगठन में रीजनल स्कूल के विलय के प्रस्ताव के खिलाफ करीब 300 से 400 छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने साफ कहा कि वे अपने स्कूल की मौजूदा पहचान और व्यवस्था में बदलाव स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर नारे लगाए और बाद में रीजनल कॉलेज के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा। छात्रों का कहना है कि स्कूल को केंद्रीय विद्यालय संगठन में शामिल करने का प्रस्ताव विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंताओं को बढ़ा रहा है। उनका तर्क है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले स्कूल के विद्यार्थियों, अभिभावकों और संबंधित पक्षों से चर्चा की जानी चाहिए।
इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें नई पीढ़ी के स्कूली छात्र बड़ी संख्या में संगठित होकर सामने आए। इसे भोपाल में ‘जेन अल्फा’ पीढ़ी के छात्रों के बड़े सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है।
अब छात्रों की नजर प्रशासन और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर है। सवाल यह भी है कि स्कूल के विलय का प्रस्ताव आखिर किस आधार पर तैयार किया गया और इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई, सुविधाओं तथा भविष्य पर क्या असर पड़ेगा? छात्रों के विरोध के बाद इस प्रस्ताव पर सरकार और संबंधित विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

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