जिस हवा में हम सांस लेते हैं, वही अगर प्रदूषित हो जाए तो शरीर के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक फेफड़ों के साथ-साथ हृदय और पूरे शरीर को प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क और फेफड़ों की बीमारी के बीच मजबूत संबंध सामने आए हैं। एक बड़े अध्ययन में वायु प्रदूषण को फेफड़ों में होने वाली क्षति की गति के मामले में प्रतिदिन एक डिब्बी सिगरेट पीने के प्रभाव के समान स्तर पर पाया गया था।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रदूषित हवा और सिगरेट का नुकसान हर व्यक्ति में बिल्कुल समान होता है। विशेषज्ञों ने इस तरह की तुलना को जोखिम समझाने का एक तरीका बताया है, न कि दोनों के प्रभावों की हूबहू बराबरी।
बच्चे विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनके फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं। प्रदूषण से खांसी, सांस लेने में परेशानी और दमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बुजुर्गों तथा पहले से सांस या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों के लिए भी जोखिम अधिक हो सकता है।
बचाव के लिए प्रदूषण का स्तर बहुत खराब होने पर खुले में अनावश्यक समय बिताने से बचें, सड़क किनारे व्यायाम न करें और घर में धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों को सीमित रखें। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें और स्थानीय वायु गुणवत्ता की जानकारी पर नजर रखें।
प्रदूषण दिखाई नहीं देता, लेकिन उसका असर शरीर के भीतर गहरा हो सकता है।

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